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NTA ने NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद की बड़ी कार्रवाई, 47 अधिकारियों को सेवा से हटाया
नई दिल्ली — देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा एजेंसियों में से एक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपने प्रशासनिक ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल करते हुए 47 अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा से मुक्त कर दिया है। यह कठोर कदम NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक विवाद के बाद एजेंसी की साख बहाल करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बर्खास्त किए गए कर्मियों में से कई अधिकारियों के खिलाफ जांच के आधार पर कानूनी कार्रवाई और आपराधिक मामले दर्ज करने की भी तैयारी की जा रही है।
देशभर में छात्रों का उग्र प्रदर्शन और विरोध
यह कार्रवाई कई हफ्तों से जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और छात्रों के आक्रोश के बाद सामने आई है। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के कई प्रमुख शहरों में छात्रों और युवा संगठनों ने लगातार प्रदर्शन कर जवाबदेही, प्रभावित छात्रों के लिए न्याय और परीक्षा प्रणाली में पूरी तरह से सुधार की मांग की थी।
पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने और पुनः परीक्षा आयोजित करने की स्थिति से शिक्षा मंत्रालय पर भारी दबाव था। इस प्रशासनिक फेरबदल की शुरुआत कुछ दिनों पहले ही उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के तबादले के साथ हो गई थी, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया था।
आउटसोर्सिंग व्यवस्था की समीक्षा और सुरक्षा सुधार
NTA द्वारा प्रस्तावित सुधारों के केंद्र में आउटसोर्सिंग व्यवस्था का पूर्ण पुनर्गठन है। अब तक परीक्षा केंद्रों के संचालन और प्रश्नपत्रों के परिवहन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए तीसरे पक्ष (थर्ड-पाटी एजेंसियों) पर अत्यधिक निर्भरता को इस तरह की सुरक्षा कमियों का मुख्य कारण माना गया है।
| सुधार का क्षेत्र | प्रस्तावित कार्य योजना |
|---|---|
| आउटसोर्सिंग मॉडल | बाहरी वेंडरों के समझौतों की समीक्षा और तीसरे पक्ष की पहुंच को सीमित करना। |
| विशेषज्ञों की भर्ती | साइबर सुरक्षा और परीक्षा सुरक्षा के लिए UPSC के ‘प्रतिभा सेतु’ पूल से विशेषज्ञों की नियुक्ति। |
| कानूनी ढांचा | पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन। |
| परीक्षा प्रारूप | भविष्य में परीक्षाओं को सुरक्षित कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) में बदलने पर विचार। |
सख्त सजा और नए कानून का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार संसद के आगामी सत्र में एक नया सख्त कानून पेश करने जा रही है, जिसके तहत परीक्षा में धांधली और पेपर लीक करने वालों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से त्वरित सुनवाई और कड़ी सजा का प्रावधान होगा।
आधिकारिक पुष्टि और पारदर्शिता की मांग
जहां एक तरफ सरकार के समर्थकों ने इस कार्रवाई को परीक्षा प्रणाली में विश्वास लौटाने की दिशा में एक जरूरी कदम बताया है, वहीं विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने मीडिया रिपोर्टों के बजाय सरकार से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की मांग की है।
शिक्षा मंत्रालय जल्द ही इन प्रशासनिक बदलावों और नए परीक्षा दिशा-निर्देशों के संबंध में विस्तृत घोषणा कर सकता है।
